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मरीज का नाम बद्री सिंह हैं जो छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। वह किडनी डिजीज की समस्या से जूझ रहे थे। रोगी को हर महीने टेस्ट करवाने पड़ते थे और बहुत से एलोपैथी दवाओं का सेवन करना पड़ रहा था, लेकिन फिर भी कोई सुधार नहीं दिख रहा था।

इलाज से पहले

  • खाना खाने में दिक्कत
  • क्रिएटिनिन लेवल लगातार बढ़ना

आयुर्वेदिक इलाज के बाद

रोगी को जब कर्मा आयुर्वेदा के बारे में पता चला तो तुरंत आयुर्वेदिक उपचार शुरू कर दिया। रोगी ने पिता ने बताया, उनके बेटे में पहले से सुधार हैं शारीरिक तौर पर फिट है। साथ ही क्रिएटिनिन लेवल भी सामान्य हो गया हैं।

  • खाना-पीना अच्छे से खाना
  • क्रिएटिनिन लेवल – 0.09mg/dl

विश्लेषण:

कर्मा आयुर्वेदा ने रोगी को किडनी डिजीज से मुक्त किया। साथ ही हर्बल दवाओं में मूत्रवर्धक गुण होते हैं और किडनी की बीमारी को कम करने में मदद करते हैं। डॉ. पुनीत धवन ने उन्हें आयुर्वेदिक चिकित्सा और उचित आहार की सलाह दी जिससे अपने रोगी के शरीर में सुधार आ गया।


किडनी की बीमारी

किडनी फेल्योर एक बहुत ही खतरनाक स्थिति हैं जिसमें किडनी अपने कार्यों को करने में सक्षम नहीं होती हैं। इसमें परिणामस्वरूप शरीर में जहरीले अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ का संचय हो सकता हैं। अगर समय पर इस किडनी फेल्योर का इलाज नहीं किया जाए तो किडनी फेल्योर  का कारण बन सकते हैं।

बता दें कि, आयुर्वेद ने बहुत प्रगति की हैं और आधुनिक दुनिया में अपनी सफलता को झंडा लहराया हैं। ये शरीर, मन और आत्मा का इलाज करने का एक प्राचीन विज्ञान हैं। आयुर्वेद पुनर्नवा, गोखुर, वरूण, कास्नी और शिरीष जैसी प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का उपयोग करते हैं जो पूरी तरह से दुष्प्रभावों से बचाता हैं। कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भी आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता हैं। इसके नेतृत्व में डॉ. पुनीत धवन हैं। यह अस्पताल 1937 में स्थापित किया गया था। यहां कई सालों से किडनी रोगियों को इलाज कर रहे हैं। डॉ. पुनीत धवन आयुर्वेदिक उपचार की मदद से 35 हजार रोगियों को इलाज करके उन्हें रोग मुक्त किया हैं। साथ ही डॉ. पुनीत अपने सभी मरीजों का आयुर्वेदिक दवाओं के साथ-साथ डाइट चार्ट की सलाह देते हैं।