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ग्लोमेरुली ब्लड में आवश्यक प्रोटीनों का स्तर बनाए रखता है। शरीर के लिए प्रोटीन आवश्यक हैं, क्योंकि ये हमारे ब्लड में मौजूद तरल पदार्थ को नियंत्रित करता हैं। प्रोटीन ऐसे कई स्पंज की तरह कार्य करता हैं जो हमारे शरीर में मौजूद बहुत से तरल पदार्थ को सोखता हैं। यदि ये ग्लोमेरुली खराब हो जाती है, तरल पदार्थ को सोखने की यह प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है और इसके परिणाम स्वरूप शरीर के प्रोटीन का नुकसान होता है। इस कारण से तरल पदार्थ शरीर के अंदर जमा होने लगता है। “नेफ्रोटिक सिंड्रोम रिलैप्स और आयुर्वेदिक उपचार”

नेफ्रोटिक सिंड्रोम रिलैप्स का क्या हैं?

मध्यम वर्गीय और बुजुर्गों के मरीजों में ज्यादातर बच्चों को अधिक नेफ्रोटिक सिंड्रोम रिलैप्स का सामना करना पड़ता है। इसके लक्षण इलाज के बाद नज़र आते हैं और उन्हें स्टेरॉयड दवाइयां फिर से लेने की जरूरत पड़ती है। कुछ बच्चे लगातार रिलैप्स का सामना करते हैं। इसे ‘लगातार नेफ्रोटिक सिंड्रोम का पुनः आरंभ’ कहा जाता है। इन बच्चों को उनके रिलैप्स  के दौरान और उपचार की आवश्यकता हो सकती है, जैसे कि मजबूत दवाएं। “नेफ्रोटिक सिंड्रोम रिलैप्स और आयुर्वेदिक उपचार”

नेफ्रोटिक सिंड्रोम के लक्षण और संकेत

नेफ्रोटिक सिंड्रोम के लक्षण धीरे धीरे शुरू होता हैं और समय के साथ विकसित होता हैं। इस सबसे आम लक्षण इस प्रकार हैं:

हाथ-पैर और एड़ियों की सूजन, त्वचा में शुष्क और खुजली, हाई ब्लड प्रैशर मांसपेशियों में ऐंठन, भूख में कमी,थकान, झाग और गहरे रंग का पेशाब आना, असामान्य वजन कम होना या वजन में वृद्धि।

नेफ्रोटिक सिंड्रोम डायग्नोस्टिक और सामान्य उपचार

अगर इसके लंबे समय तक लक्षण नज़र आए तो इसका जल्दी से जल्दी से इलाज कराया जाना चाहिए। किडनी के चरणों (स्टेजस) की पहचान के लिए ब्लड यूरीन टेस्ट इमेजिंग टेस्ट करवाना जरूरी होता हैं। एक बार रोग की पुष्टि हो जाने पर, कई लोग डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लॉट का विकल्प चुनते हैं। जब किडनी ठीक तरह से काम नहीं करता, तब डायलिसिस की आवश्यकता होती है। जब कि किडनी ट्रांसप्लॉट तब किया जाता है जब किडनी पूरी तरह से विफल हो जाता हैं और किडनी को दूसरी किडनी से बदल दिया जाता है। हालांकि, इन उपचारों से नेफ्रोटिक सिंड्रोम का इलाज नहीं किया, केवल किडनी के जीवन को बढ़ाया गया है। “नेफ्रोटिक सिंड्रोम रिलैप्स और आयुर्वेदिक उपचार”

डाइट

किडनी को स्वस्थ्य व मजबूत रखने के लिए सही डाइट का लेना आवश्यक है। इसके साथ ही उच्च प्रोटीन व सोडियम रहित खाने से बचना चाहिए। क्योंकि यह किडनी पर तनाव डाल सकता है। संसाधित खाद्य में फास्फोरस सामग्री शामिल होती है जो कि किडनी के लिए हानिकारक होता है। ताजे फल और सब्जियां किडनी के लिए अच्छा विकल्प होता है। इसे हमें रोजाना अपने भोजन में शामिल करना चाहिए। इलाज के दौरान शराब, कैफीन और धूम्रपान से परहेज किया जाना चाहिए। “नेफ्रोटिक सिंड्रोम रिलैप्स और आयुर्वेदिक उपचार”

नेफ्रोटिक सिंड्रोम रिलैप्स में आयुर्वेद कैसे मदद कर सकता है?

आयुर्वेद चिकित्सा शरीर, मन और आत्मा का एक प्राचीन विज्ञान है। आयुर्वेद का उपयोग जड़ी-बूटियों और पूर्व-ऐतिहासिक तकनीकों के साथ किया जाता है। विश्व में प्रमुख किडनी सेंटर में से एक कर्मा आयुर्वेद अस्पताल है। यह 1937 से किडनी रोगियों को 100% प्राकृतिक इलाज कर रही है। यहां हर्बल दवाइयों के द्वारा रोगियों को ठीक किया जाता है। यहां सभी तरह की किडनी रोग का प्राकृतिक इलाज किया जाता है। “नेफ्रोटिक सिंड्रोम रिलैप्स व आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट”