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दुनिया भर में अधिक से अधिक लोग किडनी की समस्याओं से ग्रस्त हैं। इनमें से अधिकतर लोग मध्यम या बुढापे की उम्र में हैं जो पहले से ही मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं। उन लोगों के बीच किडनी की समस्याएं भी आम हैं जिन्हें विरासत में मिली हो। किडनी महत्वपूर्ण कार्यों को करने में असफल रहती हैं। इसके परिणामस्वरूप किडनी की बीमारी की धीमी प्रगति हो सकती हैं, लेकिन सही समय पर उपचार नहीं करवाया जाता तो ये किडनी फेल्योर का कारण बन सकती हैं। सबसे उपयुक्त समाधान किडनी की समस्याओं के लिए मऊ, उत्तर प्रदेश में आयुर्वेदिक डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

किडनी मानव शरीर के बहुत महत्वपूर्ण कार्यों को करने में मदद करते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • शरीर में खनिजों और इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित करती हैं
  • लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करती हैं
  • अपने रक्त के एसिड बेस संतुलन को बनाए रखना
  • शरीर में घुलनशिल निकालना

किडनी फेल्योर के आम कारण हैं हाई ब्लड प्रेशर और शुगर। अन्य कारण चोट  हैं जो किडनी की बीमारी का कारण बन सकती हैं। उच्च रक्तचाप के परिणामस्वरूप किडनी, दिल और दिमाग के रक्त वाहिकाओं को नुकसान पंहुचा सकती हैं। किडनी में बहुत सारे रक्त वाहिका होते हैं, इसलिए वे आमतौर पर किडनी के लिए खतरनाक होते हैं। अन्य समस्याएं पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज और नेफ्रोटिक सिंड्रोम जैसी होती हैं जो शरीर में क्रिएटिनिन या प्रोटीन स्तर में वृद्धि का कारण होती हैं।

किडनी फेल्योर के लक्षण:

किडनी डिजीज के सामान्य संकेत और लक्षण केवल तब दिखाई देते हैं जब बीमारी बढ़ती हैं। जब एक बार किडनी गंभीर रूप से खराब हो जाती हैं तो वे अपने आप में संकेत होते हैं।

  • आंखो के चारों और सूजन, पेरियरबिटस एडीमा कहा जाता हैं
  • थकान
  • पैरों और एडियों में सूजन, जिसे पेडल एडिमा कहा जाता हैं
  • शरीर में सांसों की कमी होना
  • असामान्य वजन घटना या बढ़ना
  • मांसपेशियों में ऐंठन
  • चोट लगना और रक्त बहना
  • मल और मूत्र में रक्त आना
  • नींद की कमी होना
  • खाना खाने का मन न करना

इन लक्षणों के संकेत लंबे समय तक दिखाई देते हो तो स्थिति की पहचान करने के लिए निदान की आवश्यकता होती हैं। एक बार जब स्थिति की पृष्टि हो जाने के बाद किसी और नुकसान से बचने के लिए तत्काल उपचार आवश्यक हैं। इस स्टेज में ज्यादातर लोग डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट जैसे एलोपैथी उपचार के लिए जाते हैं। क्षतिग्रस्त किडनी के कार्यों के लिए एक ही वैकल्पिक इलाज हैं डायलिसिस, लेकिन वो किडनी फेल्योर के लिए इलाज नहीं कर रहे हैं। दूसरी ओर एक किडनी ट्रांसप्लांट यानी एक क्षतिग्रस्त किडनी को हटाने के लिए एक नई तकनीक हैं।

मऊ में किडनी फेल्योर का आयुर्वेदिक उपचार

कर्मा आयुर्वेदा दिल्ली के प्रसिद्ध किडनी उपचार केंद्र में से एक हैं। यहां 1937 से किडनी रोगियों का इलाज किया जा रहा हैं। लाखों से भी ज्यादा मरीजों का इलाज किया जा चुका हैं। साथ ही आज इस अस्पताल को धवन परिवार की 5वीं पीढ़ी यानी डॉ. पुनीत धवन चला रहे हैं। वह अपने सभी मरीजों का इलाज आयुर्वेदिक दवाओं से करते हैं। डॉ. पुनीत 35 हजार से भी ज्यादा मरीजों का इलाज करके उन्हें रोग मुक्त किया हैं वो भी डायलिसिय या किडनी ट्रांसप्लांट के बिना। बता दें कि, आयुर्वेदिक उपचार हर रोग को जड़ से खत्म करने में मदद करता हैं। आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां किडनी को मजबूत बनाती हैं। आयुर्वेदिक इलाज के उपयोग किए जाने वाली सबसे सामान्य जड़ी-बूटियों में मिल्क, थिस्टल, एक्सट्रगुलस, लाइसोरिस रूट, पुनर्नवा, गोखुर, वरूण, कासनी, शिरीष जैसी जड़ी-बूटियां शामिल हैं। जिसका इस्तेमाल किडनी रोग की दवा बनाने के लिए किया जाता हैं।