[Total: 0    Average: 0/5]

किडनी को शरीर को संतुलनकारी अंग माना जाता हैं। ये शरीर में किसी भी चीज़ के कम या ज्यादा होने को संभाल लेती हैं। मुख्य तौर पर किडनी नमक और पानी को संतुलित करने का काम करती हैं। इसके अलावा और भी कई काम जैसे ब्लड बनाना, हड्डियों को मजबूत करना यानी विटामिन डी बनाना, ब्लड प्रेशर नियंत्रित करना और टॉक्सिन यानी विषैले तत्वों को शरीर से बाहर निकालने का काम किडनी करती हैं। किडनी रोग को नज़रअंदाज करना कई बार खतरनाक हो जाता हैं, इसलिए इस रोग के भयानक रूप धारण करने से पहले ही इसका निदान किया जाना जरूरी हैं। किडनी की बीमारी का सबसे बड़ा कारण डायबिटीज और हाईपरटेंशन हैं।

  • डायबिटीज – आज डायबिटीज एक आम समस्या बन गई हैं। डायबिटीज शरीर में संतुलित हार्मोंन की कमी के कारण होती हैं। शरीर में एनर्जी का स्त्रोत शुगर स्टार्च होता हैं। जब शुगर स्टार्च को एनर्जी में परिवर्तित वाले इंसुलिन की शरीर में कमी होती हैं, तो डायबिटीज के लक्षण शुरू हो जाता हैं। शरीर में शर्करा का स्तर बढ़ने लगता हैं। डायबिटीज किडनी डिजीज होने का सबसे आम कारण हैं। डायबिटीज किडनी के फंक्शन को धीरे-धीरे कम कर देता हैं। साथ ही शुगर की उच्च मात्रा किडनी में रक्त वाहिकाओं को नुकसान पंहुचाती हैं और किडनी डिजीज का कारण बनती हैं।
  • हाइपरटेंशन – किडनी डिजीज के होने का एक अन्य आम कारण उच्च रक्तचाप हैं, जिससे हाइपरटेंशन के नाम से भी जाना जाता हैं। उच्च रक्तचाप किडनी के कामकाज को प्रभावित करता हैं। भले ही किडनी की समस्या किसी और कारण से हुई हो, लेकिन हाइपरटेंशन इसे और भी खराब कर देती हैं।

किडनी की बीमारी से होने वाले लक्षण:

  • शारीरिक और मानसिक थकान महसूस होना
  • पेशाब में रक्त या प्रोटीन आना
  • पेशाब ज्यादा आना या काफी कम हो जाना
  • भूख कम लगना
  • हाथों और पैरों में सूजन
  • रोगी को ठंड महसूस होना
  • त्वचा सूखी पड़ जाना और तेज़ खुजली होना
  • अचानक वजन कम होना
  • पेशाब गाढ़ा और गहरा पीला दिखाई देना
  • सोचने समझने की शक्ति कम होना


किडनी की बीमारी के कारण:

किडनी फेल्योर की समस्या के लिए खासतौर पर दूषित खानपान और वातावरण जिम्मेदार माना जाना हैं। आमतौर पर किडनी में परेशानी का कारण एंटीबायोटिक दवाओं का ज्यादा सेवन करने से भी होता हैं। साथ ही मधुमेह रोगियों को किडनी की शिकायत आम लोगों की तुलना में ज्यादा होता हैं। बढ़ता औद्योगीकरण और शहरीकरण भी किडनी रोग का कारण बन सकता हैं।

किडनी रोगी के आहार में परहेज

  • अपने भोजन खाने में नमक का कम से कम उपयोग करें। नमक खाने से किडनी की बीमारी और ज्यादा बढ़ जाता हैं।
  • खाने पीने की हर चीज़ में सफाई का पूरा ध्यान रखें। खाने की कोई भी चीज़ सब्जियां या फलों को अच्छे से धोएं।
  • मीट और नॉन वेज का सेवन कम से कम करें। मीट खाने वालों में किडनी रोग होने की ज्यादा संभावना होती हैं।
  • सिगरेट या शराब का बिल्कुल सेवन न करें। धूम्रपान से किडनी पर ज्यादा प्रभाव पड़ता हैं।
  • विटामिन सी युक्त खाना और तरल पदार्थों का सेवन ज्यादा करें। लहसून और प्याज सब्जियों में उपयोग जरूर करें। इसी के साथ ही सलाह भी जरूर खाएं।

संगरूर में आयुर्वेदिक उपचार

दिल्ली के प्रसिद्ध किडनी उपचार केंद्र में से एक हैं कर्मा आयुर्वेदा। इसके नेतृत्व में डॉ. पुनीत धवन हैं जो आयुर्वेदिक उपचार से किडनी रोगियों का इलाज करते हैं। कर्मा आयुर्वेदा 1937 में स्थापित किया गया था और धवन परिवार की 5वीं पीढ़ी डॉ. पुनीत ने 35 हजार से भी ज्यादा किडनी मरीजों का इलाज करते हैं वो भी डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट के बिना। कर्मा आयुर्वेदा में सिर्फ आयुर्वेदिक दवाओं पर भरोसा करते हैं।

आयुर्वेदिक प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का उपयोग करके मन, शरीर और आत्मा का इलाज करते हैं। आयुर्वेदिक उपचार में प्रयुक्त सबसे आम जड़ी-बूटियों में पुनर्नवा, गोखुर, वरूण और शिरीष हैं। ये जड़ी-बूटी किडनी की बीमारी को ठीक से काम करने और रोग के लक्षणों को खत्म करने में मदद करती हैं। साथ ही कर्मा आयुर्वेदा में भी किडनी रोगियों का इलाज किया हैं।