नेफ्रोटिक सिंड्रोम रोग , किडनी ट्रीटमेंट इन इंडिया डॉ. पुनीत धवन

नेफ्रोटिक सिंड्रोम एक आम किडनी की बीमारी है। पेशाब में प्रोटीन का जाना, रक्त में प्रोटीन की मात्रा में कमी होना, कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर होना और शरीर में सूजन से इस बीमारी के लक्षण का पता चलता हैं। “नेफ्रोटिक सिंड्रोम रोग”

साथ ही किडनी के इस रोग की वजह से किसी भी उम्र के व्यक्ति के शरीर में सूजन आ सकती है। वैसे ये रोग ज्यादातर बच्चों में देखा जाता है। उचित उपचार से रोग पर नियंत्रण होना और बाद में शरीर पर सूजन दिखाई देना। यह सिलसिला सालों कर चलता रहे तो ये नोफ्रोटिक सिंड्रोम को दर्शाता है। लंबे समय तक सूजन बार-बार होने की वजह से ये रोग मरीज और पारिवारिक सदस्यों के लिए ये चिन्ता का विषय हो सकता है। अगर सरल भाषा में समझाएं तो ये कहा जा सकता हैं कि किडनी शरीर में छलनी का काम करती है। इसके द्वारा शरीर की अनावश्यक पदार्थ अतिरिक्त पानी पेशाब द्वारा बाहर निकल जाता है। साथ ही नेफ्रोटिक सिंड्रोम में किडनी की छलनी जैसे छेद बड़े हो जाने के कारण अतिरिक्त पानी और उत्सर्जी पदार्थों के साथ-साथ शरीर के लिए आवश्यक प्रोटीन भी पेशाब के साथ निकल जाता है। जिससे शरीर में प्रोटीन की मात्रा कम हो जाती है और शरीर में सूजन आने लगती है। । नेफ्रोटिक सिंड्रोम रोग”

नेफ्रोटिक सिंड्रोम के कारण:

इस रोग को प्राथमिक या इडीयोपैथिक नेफ्रोटिक सिंड्रोम भी कहा जाता है। इस रोग को होने के कोई खास कारण सामने नहीं आए हैं, लेकिन विशेषज्ञों की माने तो श्वेतकणों में लिम्फोसाइट्स के कार्य की कमी के कारण ये रोग होता है। आहार में परिवर्तन या दवाइँ को इस रोग के लिए जिम्मेदार मानना बिल्कुल गलत है। इस बीमारी के 90% मरीज बच्चे होते हैं जिनमें नेफ्रोटिक रोग का कोई निश्चित कारण नहीं मिल पाता है। अगर हम वयस्कों की बात करें तो नेफ्रोटिक सिंड्रोम के 10% से कम मामलों में इसकी वजह अलग-अलग बीमारियां सामने आए हैं। जैसे- संक्रमण, किसी दवाई से हुआ नुकसान कैंसर, वंशानुगत रोग, मधुमेह, एस. एल. ई. और एमाइलॉयडोसिस आदि में ये सिंड्रोम उपरोक्त बीमारियों के कारण हो सकता है। । “नेफ्रोटिक सिंड्रोम रोग”

नेफ्रोटिक सिंड्रोम के लक्षण:

  • दो से छः वर्ष के बच्चों में ये रोग मुख्यत दिखाई देता है। अन्य उम्र के व्यक्तियों में इस रोग की संख्या बच्चों की तुलना में बहुत कम दिखाई देती है।
  • इस रोग की शुरुआत बुखार और खाँसी के बाद होती है।
  • शुरुआती लक्षणों में आँखों के नीचे एवं चेहरे पर सूजन दिखाई देती है।
  • आँखों पर सूजन होने के कारण कई बार मरीज सबसे पहले आँख के डॉक्टर के पास जाँच के लिए जाते हैं।
  • जब रोगी नींद से सुबह उठते है तब सूजन ज्यादा दिखाई देती है, ये इस रोग की पहचान है।
  • ये सूजन दिन के बढ़ने के साथ धीरे-धीरे कम होने लगती है और शाम तक बिलकुल कम हो जाती है।
  • रोग के बढ़ने पर पेट फूल जाता है, पेशाब कम होता है, पुरे शरीर में सूजन आने लगती है और वजन बड़ जाता है।
  • कई बार पेशाब में झाग आने और जिस जगह पर पेशाब किया हो, वहाँ सफेद दाग दिखाई देने पर यही शिकायत होती है। “नेफ्रोटिक सिंड्रोम रोग

नेफ्रोटिक सिंड्रोम का इलाज:

  • नेफ्रोटिक सिंड्रोम का निदान करना और प्रयोगशाला जांच से इसकी पुष्टि करवाना जरूरी है।
  • इलाज के दौरान सामान्य और स्वस्थ आहार लेने की सलाह दी जाती है।
  • डाइट में रोगी को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन दें।
  • अगर कोई किडनी रोग है तो प्रोटीन की मात्रा को सीमित रखें। रक्त कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने के लिए डाइट में फैट का सेवन कम करें।
  • उपचार शुरू करने से पहले बच्चे सुनिश्चित करें कि कही बच्चे को पहले से कोई इन्फेक्शन या तकलीफ न हो, ऐसे संक्रमण पर नियंत्रण स्थापित करना बहुत ही आवश्यक होता है।
  • नेफ्रोटिक सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों को सर्दी, बुखार एवं अन्य प्रकार के संक्रमण होने की संभावना अधिक रहती है।
  • इलाज के दौरान इन्फेक्शन होने से रोग बढ़ सकता है। इसलिए उपचार के दौरान संक्रमण न हो इसके लिए पूरी सावधानी रखना जरूरी होता है। । नेफ्रोटिक सिंड्रोम रोग”