क्रोनिक किडनी रोग के आयुर्वेदिक उपचार, किडनी ट्रीटमेंट इन इंडिया डॉ. पुनीत धवन

क्रोनिक किडनी रोग सी.के.डी (CKD) में दोनों किडनी को खराब होनें में महीनों से सालों तक का समय लगता हैं। इसकी शुरूआत में दोनों किडनी की कार्यक्षमता में अधिक कमी होने की वजह से कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन जैसे-जैसे किडनी ज्यादा खराब होने लगती है। साथ ही इसमें मरीज की तकलीफ बढ़ती जाती हैं। क्रोनिक किडनी रोग के आयुर्वेदिक उपचार- डॉ. पुनीत धवन”
क्रोनिक किडनी रोग के आयुर्वेदिक उपचार 1

क्रोनिक किडनी रोग के लक्षण

हर मरीज में किडनी खराब होने के लक्षण और उसकी गंभीरता अलग-अलग होती है। रोगी इस अवस्था में पाये जाने वाले लक्षण कुछ इस प्रकार के होते हैं।

  • कुछ खाने का मन ना होना, उल्टी, उबकाई आना।
  • कमजोरी महसूस होना और वजन कम हो जाना।
  • पैरों के निचले हिस्से में सूजन आना।
  • रोज़ सुबह के समय आंखों के चारों तरफ और चेहरे पर सूजन आना।
  • थोड़ा सा भी काम करने पर थकावट महसूस होना और सांस फूलना।
  • खून में फीकापन रक्तअल्पता (एनीमिया) होना। किडनी में बनने वाला एरिथ्रोपोएटिन नामक हार्मोन में कमी होने से शरीर में खून कम बनता है।
  • शरीर में खुजली होना।
  • पीठ के निचले हिस्से में दर्द होना।
  • रोज़ रात के समय बार-बार पेशाब जाना (nocturia)।
  • याद्दाश्त में कमी होना, नींद में नियमित क्रम में परिवर्तन होना।
  • दवा लेने के बाद भी उच्च रक्तचाप का नियत्रण में नहीं आना।
  • स्त्रियों में मासिक में अनियमितता और पुरुषों में नपुंसकता का होना।

किडनी में बनने वाला सक्रिय विटामिन ‘डी’ का कम बनना, जिससे बच्चों की ऊंचाई कम बढ़ती है और वयस्कों में हड्डियों में दर्द रहता है। “क्रोनिक किडनी रोग के आयुर्वेदिक उपचार- डॉ. पुनीत धवन”

किडनी में होने वाले नुकसान रोकना

  • किडनी को नुकसान पहुंचाने वाली दवाएं जैसे- कोई एटिवायोटिक्स, दर्दनाशक दवाएं, आयुर्वेदिक भस्म वगैरह का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • किडनी को नुकसान पंहुचाने वाले अन्य रोग जैसे- दस्त, उल्टी, मलेरिया, सेप्टीसीमिया आदि का तुरंत उपचार करवाना चाहिए।

किडनी को सीधे तौर पर नुकसान करने वाले रोगों जैसे- पथरी, मूत्रमार्ग का संक्रमण का समय पर शीघ्र उपचार करवाना चाहिए। “क्रोनिक किडनी रोग के आयुर्वेदिक उपचार- डॉ. पुनीत धवन”

जीवन स्तर में सुधार

क्रोनिक किडनी रोग के समय अपनी जीवन स्तर में सुधार लाना। इनसे किडनी की खराबी होने के खतरे कम हो सकते हैं।

  • धूम्रपान छोड़ें।
  • वजन नियंत्रण में रखें, व्यायाम करें एवं क्रियाशील और ऊर्जावान बने रहें।
  • तम्बाकू, गुटखा तथा शराब का सेवन ना करे।
  • भोजन का उचित मार्गदर्शन लेकर संतुलित आहार लें एवं नमक की मात्रा कम रखें।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवायें लें। किडनी की बीमारी की गंभीरता के अनुसार उनकी मात्रा घटाई या बढ़ाई जा सकती है।

किडनी विशेषज्ञ से नियमित मिले एवं उनके सुझावों का पालन करें। “क्रोनिक किडनी रोग के आयुर्वेदिक उपचार- डॉ. पुनीत धवन”

क्रोनिक किडनी रोग के उपचार

  • दवा और परहेज
  • डायालिसिस
  • किडनी प्रत्यारोपण
  • कर्मा आयुर्वेदा किडनी उपचार केंद्र

क्रोनिक किडनी रोग (क्रोनिक किडनी फेल्योर-CKD) के शुरूआत में जब किडनी ज्यादा खराब नहीं हुई होती तो उस स्थिति में निदान के बाद आयुर्वेदिक दवाओं आहार में परहेज द्वारा इलाज करवाना चाहिए। जब दोनों किडनी ज्यादा खराब हो जाती है और उनमें से कई मरीज किडनी प्रत्यारोपण जैसा विशिष्ट उपचार कराते है, लेकिन अब आप कर्मा किडनी उपचार केंद्र कर्मा आयुर्वेदा, योग्य आयु्र्वेदचार्य डॉ. पुनीत धवन से किडनी का इलाज करवा सकते हैं वो बिना प्रत्यारोपण और बिना साइट इफेक्ट्स दवाओं से। “क्रोनिक किडनी रोग के आयुर्वेदिक उपचार- डॉ. पुनीत धवन”